CAA जानने से पहले भारत की नागरिकता क्या है जानिए
भारतीय नागरिकता
भारतीय संविधान भाग 2 में अनुच्छेद 5 से 11 तक नागरिकता के बारे में चर्चा की गई है
१. अर्थ एवं महत्व
भारत में दो तरह के लोग रहते हैं। नागरिक और गैर नागरिक (विदेशी)। भारतीय नागरिक को राज्य के पूर्ण सदस्य होते हैं और उनकी इस पर पूर्ण निष्ठा होती है। उन्हें सभी सिविल और राजनीतिक अधिकार प्राप्त होते हैं। दूसरी ओर- गैर नागरिक (विदेशी) किसी अन्य देश के नागरिक होते हैं। इसलिए उन्हें सभी नागरिक एवं राजनीतिक अधिकार प्राप्त नहीं होते हैं। इनकी दो श्रेणियां होती है :- विदेशी मित्र एवं विदेशी शत्रु। विदेशी मित्र वे होते हैं जिनके भारत के साथ सकारात्मक संबंध होते हैं। विदेशी शत्रु वे होते हैं जिनके साथ भारत के नकारात्मक संबंध होते हैं या उनके साथ कोई युद्ध चल रहा हो। उन्हें कम अधिकार प्राप्त होते हैं तथा वें गिरफ्तारी और नजरबंदी के दायरे में रहते हैं देश की सुरक्षा के लिए।
भारत के नागरिक को भारतीय संविधान के तहत मूल अधिकार, लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मतदान करने, संसद एवं राज्य विधानसभा की सदस्यता के लिए, सर्वजनिक पदों जैसे-( राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, महान्यायवादी एवं आदि ) पर योग्यता रखने का अधिकार प्राप्त होता है
उपरोक्त अधिकारों के साथ नागरिकों को भारत के प्रति कुछ कर्तव्यो का भी निर्माण करना होता है। उदाहरण के लिए कर भुगतान (टैक्स), राष्ट्रीय ध्वज एवं राष्ट्रीय गान का सम्मान, देश की सुरक्षा आदि।
२. नागरिकता अधिनियम 1955
नागरिकता अधिनियम(1955) संविधान लागू होने के बाद अर्जुन एवं समाप्ति के बारे में उपबंध करता है। इस अधिनियम को अभी तक 9 बार संशोधित किया गया है। यह संशोधन 1955 के बाद 1957, 1960, 1985, 1986, 1992, 2003, 2005, 2015 और 2019 में संशोधन किया गया।
मूल रूप से, नागरिकता अधिनियम (1955) ने भी राष्ट्रमंडल नागरिकता प्रदान की है। लेकिन इस प्रावधान को नागरिकता (संशोधन) अधिनियम, 2003 के तहत रद्द कर दिया गया।
३. नागरिकता का अर्जुन
नागरिकता अधिनियम 1955 नागरिकता प्राप्त करने की 5 शर्तें बताता है। जैसे - जन्म, वंशानुगत, पंजीकरण, प्राकृतिक एवं क्षेत्र समावष्टि के आधार पर।
भारत की नागरिकता जन्म आधार पर
- भारत में 26 जनवरी 1950 को या उसके बाद परंतु 1 जुलाई 1947 से पूर्व जन्मा व्यक्ति अपने माता पिता के जन्म की राष्ट्रीयता के बावजूद भारत का नागरिक होगा।
- भारत में 1 जुलाई को या उसके बाद केवल तभी भारत का नागरिक माना जाएगा, यदि उसके जन्म के समय उसके माता-पिता में से कोई एक भारत का नागरिक हो।
- भारत ने पदस्थ विदेशी राजनयिक एवं शत्रु देश के बच्चों को भारत की नागरिकता अर्जन करने का अधिकार नहीं है
भारत की नागरिकता वंश के आधार पर
- यदि कोई व्यक्ति 26 जनवरी 1950 के बाद या 10 दिसंबर 1992 से पहले भारत के बाहर जन्मा व्यक्ति वह वंश के आधार पर भारत की नागरिकता ले सकता है। यदि जन्म के समय उसका पिता भारत का नागरिक हो।
- 10 दिसंबर 1992 या उसके बाद देश से बाहर जन्मा व्यक्ति भी भारत का नागरिक बन सकता है। यदि उसके जन्म के समय उसके माता-पिता में से कोई एक भारत का नागरिक हो।
- 3 दिसंबर 2004 के बाद भारत के बाहर जन्मा व्यक्ति भारत की नागरिकता नहीं हो सकता। लेकिन जन्म के 1 वर्ष के अंदर उसे भारत की नागरिकता दिलाई जा सकती है।
भारत की नागरिकता पंजीकरण द्वारा
- केंद्र सरकार आवेदन प्राप्त किसी व्यक्ति को नागरिक के रूप में पंजीकरण कर सकती है, यदि वह निम्न श्रेणियों से संबंधित हो-
- 7 वर्ष भारत में रह चुका हो।
- वह व्यक्ति जो जो विभाजन से पहले भारत का हिस्सा हो।
- वह व्यक्ति जो भारतीय नागरिक से विवाह किया हो और वह 7 वर्ष पूर्व भारत में रह चुका हूं।
- भारत के नागरिक के नाबालिक बच्चे।
- कोई व्यक्ति, जो पूरी आयु तथा क्षमता का हो तथा उसके माता-पिता भारत के नागरिक के रूप में पंजीकृत हो।
- कोई व्यक्ति जो समुंद्र पार किसी देश के नागरिक के रूप में 5 वर्ष पंजीकृत हो या पंजीकरण के आवेदन देने के बाद 12 माह से साधारण निवास कर रहा हो।
- एक व्यक्ति जन्म से भारतीय मूल्य का माना जाएगा यदि वह या उसके माता पिता में से कोई अविभाजित भारत मैं पैदा हुए हो यह 15 अगस्त 1947 के बाद भारत का अंग बनने वाले किसी भू -क्षेत्र का निवासी हो।
भारत की नागरिकता प्राकृतिक रूप से
- केंद्र सरकार आवेदन प्राप्त होने पर किसी व्यक्ति को प्राकृतिक रूप से नागरिकता प्रमाण पत्र प्रदान कर सकती है। यदि वह व्यक्ति निम्नलिखित योग्यताएं रखता है।
- ऐसे देश से संबंधित नहीं हो, जहां भारतीय नागरिक प्राकृतिक रूप से नागरिक नहीं बन सकते।
- यदि वह दूसरे देश का नागरिक हो तो भारत की नागरिकता लेने के लिए उसे अपने देश की नागरिकता को त्यागना पड़ेगा।
- यदि में भारत में रह रहा हूं या भारत सरकार की सेवा में हो तो उसने नागरिकता संबंधित आवेदन देने से कम से कम 12 माह से पूर्व भारत में रह रहा होना चाहिए।
- उसका चरित्र अच्छा होना चाहिए
- उसे संविधान के आठवीं अनुसूची में उल्लेखित भाषाओं का अच्छा ज्ञान होना चाहिए।
- भारत सरकार उपरोक्त प्राकृतिक शर्तों के मामलों पर एक यह सभी दावा हटा सकती है। यदि व्यक्ति की विशेष सेवा विज्ञान, दर्शन, कला, साहित्य, विश्व शांति या मानव उन्नति से संबंधित हो।
भारत की नागरिकता क्षेत्र समाविष्टि द्वारा
- किसी विदेशी क्षेत्र द्वारा भारत का हिस्सा बनने पर भारत सरकार उस क्षेत्र से संबंधित विशेष व्यक्तियों को भारत का नागरिक घोषित करती है। ऐसे व्यक्ति उल्लेखनीय तारीख से भारत के नागरिक होते हैं। उदाहरण के लिए जब पांडुचेरी भारत का हिस्सा बना तो भारत सरकार ने नागरिकता आदेश 1962 में जारी किया। यह आदेश नागरिकता अधिनियम 1955 के तहत जारी किया गया था
नागरिकता अधिनियम, 1955 के संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार प्राप्त नागरिकता खोने के तीन कारण बताए गए हैं-
त्यागना, बर्खास्तगी तथा वंचित करना।
स्वैच्छिक त्याग :- कोई व्यक्ति अपनी पूर्ण आयु या क्षमता का हो। तो वह अपनी इच्छा के अनुसार अपनी नागरिकता छोड़ सकता है यदि देश में युद्ध का माहौल हो तो भारत सरकार उसे पंजीकरण को एक तरफ रख सकती है उस व्यक्ति के बच्चे यदि नाबालिक है तो उनकी भी नागरिकता खत्म हो जाएगी यदि वह 18 वर्ष से ज्यादा है तो उनकी नागरिकता बनी रह सकती है।
बर्खास्तगी के द्वारा :- यदि कोई भारतीय नागरिक स्वेच्छा से किसी अन्य देश की नागरिकता को ग्रहण कर ले तो उसकी भारतीय नागरिकता स्वयं ही बर्खास्त हो जाएगी। हालांकि यह व्यवस्था तब नहीं लागू होगी जब भारत युद्ध में व्यस्त हो।
वंचित करने द्वारा :- केंद्र सरकार द्वारा भारतीय नागरिक को आवश्यक रूप से बर्खास्त करना होगा यदि:
- यदि नागरिकता फर्जी तरीके से प्राप्त की गई हो।
- यदि नागरिक ने संविधान के प्रति अनादर जताया हो।
- यदि नागरिक ने युद्ध के दौरान शत्रु के साथ गैरकानूनी रूप से संबंध स्थापित किए हो या उसने कोई राष्ट्र विरोधी सूचना दी हो।
- पंजीकरण या प्राकृतिक नागरिकता के 5 वर्ष के दौरान नागरिक को किसी देश में 2 वर्ष की कैद हुई हो।
- नागरिक सामान्य रूप से भारत के बाहर 7 वर्षों से रह रहा हो।
"नमस्कार दोस्तों इस ब्लॉक में यदि कुछ और जोड़ने लायक हो तो कमेंट करके बताएं"
0 Comments